सूरत के 220 से अधिक टेक्सटाइल बाजारों को अशांत धारा से मुक्त किया जाए: कैट

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सूरत, 4जून। कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) के राष्ट्रीय वाइस चेयरमैन एवं टेक्सटाइल व गारमेंट समिति के राष्ट्रीय चेयरमैन चम्पालाल बोथरा ने सूरत के कपड़ा बाजारों में लागू अशांत धारा (Disturbed Areas Act) को लेकर गुजरात सरकार का ध्यान एक बेहद महत्वपूर्ण व्यावहारिक और कानूनी विषय की ओर आकर्षित किया है। उन्होंने गुजरात के माननीय मुख्यमंत्री भूपेंद्र भाई पटेल एवं माननीय उप मुख्यमन्त्री एवं गृह राज्य मंत्री हर्ष भाई संघवी को एक उच्च स्तरीय पत्र भेजकर सूरत के सभी स्थापित होलसेल कपड़ा बाजारों को इस कानून के दायरे से तत्काल बाहर करने की मांग की है।

बोथरा ने कहा कि धरातलीय सच्चाई यह है कि 95% से अधिक लेनदेन एक ही समाज के बीच होता है। कैट नेता चम्पालाल बोथरा ने धरातल की वास्तविक स्थिति की समीक्षा करते हुए कहा सूरत के रिंग रोड, सलाबतपुरा, महिधरपुरा, लिंबायत तथा अन्य प्रमुख कपड़ा बाजार पूर्णतः व्यावसायिक क्षेत्र हैं। इस मार्केट विस्तार में 95% से अधिक व्यापारी स्थानीय बहुसंख्यक समाज से आते हैं, जिनके बीच प्रतिदिन दुकानों को किराये पर देने, रेंट एग्रीमेंट नवीनीकरण और खरीद-बिक्री का आपसी लेनदेन निरंतर चलता रहता है। चूंकि यह विशुद्ध कमर्शियल एरिया है, इसलिए यहाँ सांप्रदायिक या जनसांख्यिकीय विवाद का कोई अस्तित्व ही नहीं है। उन्होंने आगे कहा कि इस कानून के कारण अपनों के बीच होने वाले सामान्य व्यापारिक लेनदेन पर भी सरकारी अनुमति की अनिवार्यता लागू है, जिससे होने वाले भारी आर्थिक नुकसान का सीधा शिकार यहाँ के स्थानीय और शांतिप्रिय व्यापारी ही हो रहे हैं।

चम्पालाल बोथरा ने कानूनी पहलू को रेखांकित करते हुए कहा कि अशांत धारा मूल रूप से संवेदनशील आवासीय क्षेत्रों (Residential Areas) में सामाजिक सौहार्द एवं जनसांख्यिकीय संतुलन बनाए रखने के उद्देश्य से बनाई गई थी। इसके विपरीत, सूरत के कपड़ा बाजार पूरी तरह से ‘होलसेल कमर्शियल हब’ हैं, जहाँ कोई आवासीय स्वरूप नहीं है।

कानूनन, विशुद्ध व्यावसायिक संपत्तियों के नियमित ट्रांसफर और लीज डीड पर इस एक्ट की जटिलताओं को लागू रखना इसके मूल विधायी उद्देश्य के अनुकूल नहीं है। पिछले एक दशक से अधिक समय में यहाँ हजारों लेनदेन हुए हैं, लेकिन केवल व्यापारिक संपत्ति के हस्तांतरण के कारण कानून-व्यवस्था बिगड़ने का एक भी उदाहरण सामने नहीं आया है।

बोथरा ने बताया कि एक साधारण रेंट एग्रीमेंट या दुकान ट्रांसफर की अनुमति (NOC) मिलने में ही कम से कम 1 महीने का समय लग जाता है। इस व्यवस्था के कारण दुकान एवं कार्यालय के हस्तांतरण में अनावश्यक देरी होती है। छोटे एवं मध्यम व्यापारियों पर वकीलों और दस्तावेजीकरण का अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ता है। प्रक्रियात्मक जटिलताओं के कारण लालफीताशाही और बिचौलिया संस्कृति को बढ़ावा मिलता है। निवेश पर असर रेंटल मार्केट की गति प्रभावित होने से करोड़ों रुपये के नए निवेश और बाजारों के पुनर्विकास की गति धीमी पड़ती है।