UPI पर 0.4% MDR से छोटे व्यापारियों पर बढ़ सकता है लागत दबाव

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सूरत, 25 सितम्बर । कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं CAIT टेक्सटाइल एवं गारमेंट समिति के राष्ट्रीय चेयरमैन चम्पालाल बोथरा ने 15 अक्टूबर 2026 से लागू होने वाली नई UPI Merchant Discount Rate (MDR) व्यवस्था के संबंध में केंद्र सरकार, RBI एवं NPCI से छोटे व्यापारियों, MSMEs तथा कम-मार्जिन वाले व्यवसायों के हित में व्यावहारिक सुधार करने का आग्रह किया है। बोथरा ने स्पष्ट किया कि CAIT टेक्सटाइल एवं गारमेंट समिति डिजिटल इंडिया और UPI व्यवस्था का विरोध नहीं करती, बल्कि इसे अधिक मजबूत, टिकाऊ, व्यापारी-अनुकूल और व्यापक बनाने के पक्ष में है। चिंता इस बात को लेकर है कि नई MDR व्यवस्था का अतिरिक्त लागत प्रभाव छोटे व्यापारियों और कम-मार्जिन वाले व्यवसायों के डिजिटल भुगतान व्यवहार को प्रभावित न करे।

चम्पालाल बोथरा ने कहा कि MDR स्वयं सरकार का राजस्व या कर नहीं है। लेकिन यदि अतिरिक्त भुगतान लागत के कारण कुछ व्यापारी डिजिटल भुगतान के स्थान पर नकद लेन-देन को प्राथमिकता देने लगते हैं और बिना लेखे-जोखे वाले कारोबार की प्रवृत्ति बढ़ती है, तो इसका प्रभाव आर्थिक पारदर्शिता और GST अनुपालन पर अप्रत्यक्ष रूप से पड़ सकता है। इसलिए नीति बनाते समय केवल MDR की लागत को नहीं, बल्कि डिजिटल भुगतान से मिलने वाली पारदर्शिता और औपचारिक अर्थव्यवस्था पर उसके व्यापक प्रभाव को भी ध्यान में रखना चाहिए।

उन्होंने कहा कि पिछले वर्षों में UPI ने छोटे व्यापारियों को डिजिटल भुगतान व्यवस्था से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। डिजिटल भुगतान से लेन-देन का रिकॉर्ड उपलब्ध होता है, जिससे कारोबार की बैंकिंग हिस्ट्री, औपचारिक वित्तीय पहुंच और कर अनुपालन को बढ़ावा मिल सकता है।उनके अनुसार, यदि किसी कारण से डिजिटल भुगतान की जगह नकद और अनरिकॉर्डेड (बिना लेखे-जोखे वाले) लेन-देन बढ़ते हैं, तो इसका दीर्घकालीन असर औपचारिक अर्थव्यवस्था की पारदर्शिता पर पड़ सकता है और GST अनुपालन तथा कर-संग्रह पर अप्रत्यक्ष प्रभाव पड़ने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

बोथरा ने सरकार, RBI एवं NPCI से आग्रह किया कि व्यापारिक संगठनों के साथ व्यापक संवाद कर नई MDR व्यवस्था के वास्तविक धरातलीय प्रभाव की समीक्षा की जाए तथाआवश्यकता के अनुसार समयबद्ध सुधार किए जाएं।