नवरात्रि से दीपावली तक देश में ₹7 लाख करोड़ से अधिक के कारोबार की संभावना: कैट

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सूरत, 28 अक्टूबर। कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं CAIT टेक्सटाइल एंड गारमेंट कमेटी के राष्ट्रीय चेयरमेन चम्पालाल बोथरा ने बताया कि इस वर्ष नवरात्रि से दीपावली तक देशभर में ₹7 लाख करोड़ से अधिक के त्योहारी कारोबार की संभावना है। यह पिछले वर्ष के लगभग ₹6.05 लाख करोड़ के कारोबार से 15 से 18 प्रतिशत अधिक रहने का अनुमान है। 

बोथरा ने कहा कि त्योहारी कारोबार में टेक्सटाइल एवं गारमेंट क्षेत्र का महत्वपूर्ण योगदान रहने की संभावना है। टेक्सटाइल एवं फैब्रिक्स तथा रेडीमेड गारमेंट्स का संयुक्त कारोबार लगभग ₹77,000 करोड़ होने का अनुमान है, जो कुल त्योहारी कारोबार का लगभग 11 प्रतिशत है। इसमें टेक्सटाइल एवं फैब्रिक्स का योगदान लगभग ₹28,000 करोड़ (4 प्रतिशत) तथा रेडीमेड गारमेंट्स का योगदान लगभग ₹49,000 करोड़ (7 प्रतिशत) रहने की संभावना है। उन्होंने कहा कि त्योहारी कारोबार देश के कपड़ा व्यापारियों, कारीगरों, निर्माताओं और सेवा प्रदाताओं की आजीविका से जुड़ा है। भारतीय उत्पादों की मांग बढ़ने से स्थानीय बाजारों को मजबूती मिलती है तथा घरेलू अर्थव्यवस्था और रोजगार का विस्तार होता है। नवरात्रि, दुर्गा पूजा, दशहरा, करवा चौथ, धनतेरस और दीपावली के दौरान साड़ियों, लहंगों, कुर्तियों, ड्रेस मटेरियल, रेडीमेड कपड़ों और बच्चों के परिधानों की मांग बढ़ती है। इसके साथ शुरू होने वाला विवाह सीजन तथा सर्दियों की मांग भी कपड़ा एवं गारमेंट व्यापार के लिए महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करती हैं। 

बोथरा ने कहा कि गांवों और शहरों के स्थानीय बाजारों, पारंपरिक मंडियों तथा नजदीकी दुकानों से खरीदारी करने पर छोटे व्यापारियों, खुदरा दुकानदारों, कारीगरों और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को सीधा लाभ मिलता है। यही व्यापारी और उद्यम देश के टेक्सटाइल एवं गारमेंट कारोबार की रीढ़ हैं। बोथरा ने केंद्र एवं राज्य सरकारों से कपड़ा उद्योग और व्यापार की समस्याओं के समाधान, घरेलू निर्माताओं को प्रोत्साहन तथा गांवों और शहरों के छोटे व्यापारियों एवं एमएसएमई को मजबूत बनाने के लिए आवश्यक कदम उठाने का आग्रह किया। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आगामी विवाह सीजन और सर्दियों की मांग से कपड़ा एवं गारमेंट कारोबार को आगे भी प्रोत्साहन मिलेगा। साथ ही उन्होंने व्यापारियों एवं उपभोक्ताओं से भारतीय उत्पादों को प्राथमिकता देने और पारंपरिक स्थानीय बाजारों को मजबूत बनाने की अपील की।