UPI पर प्रस्तावित MDR शुल्क स्थगित किए जाने का कैट ने किया स्वागत, व्यापारियों की बड़ी जीत बताया

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सूरत, 14 अक्टूबर। कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं टेक्सटाइल एवं गारमेंट कमेटी के राष्ट्रीय चेयरमैन चम्पालाल बोथरा ने UPI पर ₹2,000 से अधिक के लेन-देन पर प्रस्तावित 0.4 प्रतिशत मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) को फिलहाल स्थगित किए जाने के NPCI के निर्णय का स्वागत किया है। उन्होंने इसे देश के लगभग 9 करोड़ व्यापारियों, विशेष रूप से छोटे दुकानदारों, कपड़ा एवं गारमेंट कारोबारियों तथा MSME के हित में बड़ी जीत बताया।

चम्पालाल बोथरा ने कहा कि डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने में देश के करोड़ों व्यापारियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। ऐसे में डिजिटल भुगतान पर कोई भी नया शुल्क लागू करने से पहले छोटे व्यापारियों, खुदरा दुकानदारों, कपड़ा व्यापारियों और MSME पर पड़ने वाले आर्थिक प्रभाव का गंभीरता से आकलन किया जाना आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि कैट के राष्ट्रीय महामंत्री एवं सांसद श्री प्रवीण खंडेलवाल के नेतृत्व में व्यापारियों के हितों को लेकर लगातार प्रयास किए गए हैं। 30 सितंबर को केंद्रीय वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण से मुलाकात कर व्यापारियों की चिंताओं को उनके समक्ष रखा गया था। वित्त मंत्री ने व्यापारियों के हितों की रक्षा का आश्वासन दिया था। चम्पालाल बोथरा ने सरकार और NPCI द्वारा व्यापारियों की चिंताओं पर विचार किए जाने का स्वागत किया। त्योहारी सीजन में नया शुल्क व्यापार को प्रभावित कर सकता था

चम्पालाल बोथरा ने कहा कि दीपावली और धनतेरस का समय व्यापार जगत के लिए सबसे महत्वपूर्ण बिक्री अवधियों में से एक होता है। इस दौरान कपड़ा, गारमेंट, रेडीमेड, खुदरा और अन्य बाजारों में डिजिटल भुगतान का व्यापक उपयोग होता है। ऐसे समय में UPI लेन-देन पर नया शुल्क लागू होने से व्यापारियों की लागत बढ़ सकती थी और भुगतान व्यवस्था को लेकर भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती थी।

उन्होंने कहा कि त्योहारी सीजन में 15 अक्टूबर से प्रस्तावित व्यवस्था लागू करने की समय-सीमा को लेकर सूरत, तिरुपुर, इरोड, मदुरई, इचलकरंजी, मालेगांव, जोधपुर, जयपुर, मुंबई, अहमदाबाद, भीलवाड़ा आदि मंडियों की ओर से कैट टेक्सटाइल एवं गारमेंट कमेटी ने विरोध दर्ज कराया था। प्रस्तावित शुल्क को दीपावली के बाद तक स्थगित करने का निर्णय व्यापारियों के लिए राहतकारी कदम है।

चम्पालाल बोथरा ने कहा कि डिजिटल भुगतान व्यवस्था की सफलता का आधार इसकी सरलता, सुगमता और कम लागत है। यदि छोटे व्यापारियों पर अतिरिक्त वित्तीय भार डाला जाता है, तो इसका असर व्यापारिक गतिविधियों और डिजिटल भुगतान को अपनाने की गति पर पड़ सकता है।