नई कमेटी के आने के बाद व्यवस्था “अंधेर नगरी चौपट राजा” जैसा
सूरत, 8 सितंबर। सूरत टेक्सटाईल मार्केट मे बीते 18 जुलाई को सम्पन्न हुये चुनाव मे नई कमेटी के आने के बाद यहां के व्यापारियों को उम्मीद थी कि काफी कुछ सुधार होगा एवं व्यवस्था मे महत्वपूर्ण परिवर्तन देखने को मिलेगा। चुनाव मे जीत कर नई कमेटी के आने के बाद परिवर्तन देखने को मिला तो जरूर,लेकिन “अंधेर नगरी चौपट राजा” जैसा । पार्किग चार्ज के नाम पर खुली लूट जा रही है जिसको लेकर यहां के व्यापारियों मे काफी असंतोष देखा जा रहा है।
उल्लेखनीय है कि पिछले कुछ दिनो से गेट पर तैनात व्यक्ति द्वारा बाईक पार्किग के लिये घंटे -दो घंटे का भी बीस रूपये लिया जा रहा है एवं इस दर से कैलकुलेशन किया जाये तो बारह घंटे का चार्ज 120 रूपये हो जाता है जो कि सूरत मे किसी भी पार्किंग के मुकाबले कई गुना अधिक है। बाईक पार्किग के लिये निर्धारित यह दर व्यापारियों से लूट जैसा ही है। जानकारी के अनुसार बाईक संख्या 8812 के लिये सायं सवा छ बजे इलेक्ट्रॉनिक पर्ची बनाई गई एवं 20 रूपये लिया गया। अमूमन देखा जाये तो मार्केट 8 बजे रात को बंद होता है एैसे मे महज दो घंटे के लिये 20 रूपये लेना कितना वाजिब है? अगर एसटीएम कमेटी को यहां के व्यापारियों के भले की सोचनी थी तो मनपा जैसा ही घंटे के अनुपात मे पार्किग चार्ज किया जाता। वसूली के लिये सादी वर्दी मे खडा किया गया व्यक्ति किसी पार्किग ठेकेदार का है जिसे एसटीएम ने ठेका दिया है ? अथवा एसटीएम कमेटी ने ही उसे खडा किया है?
उल्लेखनीय है कि रिंग रोड फ्लायओवर ब्रिज के नीचे महानगर पालिका द्वारा संचालित पे एण्ड पार्क मे पार्किग दर प्रति तीन घंटे 10 रूपये है उसके बाद छह घंटे के लिये 15 रूपये है। इसके विपरीत एसटीएम की खुली लूट को लेकर मार्केट के व्यापारियों मे जबरदस्त असंतोष देखने को मिल रहा है।
यह भी गौरतलब है कि एसटीएम मार्केट व्यापारियों को बाईक पार्किंग के लिये मासिक पास जारी नही करती है। उनकी माने तों यहां पर व्यापारियों को सात महीने का पास जारी किया जाता है जिसका शुल्क 2070 रूपये है जो कि किसी भी हिसाब से व्यापारियो के सहूलियत के विपरीत है। सब मिलाकर यह कवायद किसी को निजि लाभ पहुंचाने की जुगत तो नही है?
दिलचस्प है कि गेट पर तैनात व्यक्ति सिक्योरिटी यूनिफार्म मे ना होकर प्राइवेट ड्रेस मे खडा रहता है जिससे व्यापारियो को भ्रम है कि यह व्यक्ति किसी प्राईवेट पार्किगं वाले का बंदा तो नही है जिसे पार्किंग शुल्क वसूली का ठेका दिया गया हो ? क्योंकि अगर एसटीएम सिक्योरिटी ही पार्किंग शुल्क वसूलती, तो सिक्योरिटी जवान यूनिफार्म मे होते। जिससे काफी कुछ मामला संदिग्ध लग रहा है। अब नई कमेटी से अपेक्षित सहूलियत के उलट व्यापारियों को शुरूआती दिनों मे ही मुसीबतें शुरू हो जाये तो आगे-आगे देखिये,होता है क्या ? जैसा प्रश्नचिन्ह लगना स्वाभाविक है।











