केन्द्र सरकार के आम बजट‌ पर है व्यापारियों की नजर

नारायण शर्मा ( कर सलाहकार )

सूरत , 25 जनवरी । वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण संसद में कुछ ही दिनों में आम बजट पेश करेगी । इस बजट को लेकर सूरत के कपड़ा कारोबारियो को काफी अपेक्षाये है । जीएसटी एवं आयकर के हर दिन बदलते नियमो तथा नोटिफिकेशन के साथ – साथ कोरोना महामारी के चलते सूरत का कपड़ा उद्योग अपने खस्ताहाली की ओर है ।  दिन – प्रतिदिन उत्पादन कम होने से बेपटरी हो चुके कपड़ा उद्योग को गति देने के लिए वित्त मंत्री को जीएसटी व आयकर नियमो में सरलीकरण के लिए सूरत के औधोगिक एवं व्यापारिक संगठनो की ओर से कुछ मांगे की गई है अब देखना यह है कि इन व्यापार जगत की अपेक्षाओ पर वित्त मंत्री महोदया कितना खरा उतरती है ?

 आयकर को लेकर यह है अपेक्षायें

1- वेतन भोगियो के लिए धारा 16 के तहत स्टैंडर्ड डिडक्शन की सीमा को 50 हजार से बढ़ाकर 75 हजार की जाए जिससे वेतन भोगियों को सीधा सीधा लाभ मिल सके।
2- आयकर रिटर्न जो कि अब केवल एक ही साल का रिटर्न फाइल हो सकता है उसे पुरानी परंपरा के तहत पिछले दो साल की भी रिटर्न फाइल को वापसी किया जाए ताकि जो टैक्स पेयर बैंक लोन लेना चाहते है उन्हें आसानी से मिल सके।
3- 80 सी की लिमिट 1.50 से बढ़ाकर 2.50 की जाए साथ ही पीपीएफ की लिमिट को 1.50 से बढ़ाकर 3 लाख की जाए इससे इन्वेस्टमेंट को बढ़ावा मिलेगा।
4- पिछले बजट में आयकर के टैक्स स्लैब को दो भागों में विभाजित किया गया था पर करदाताओं को ऑल डिडक्शन की प्रकिया ही पसंद रही इसको ध्यान में रखते हुए एक ही टैक्स स्लैब लाया जाए उंसमे भी टैक्स 5 व 10 व 15 ही टैक्स की प्रतिसत रखा जाए ।
5-सेविंग एकाउंट के व्याज छूट की लिमिट जो 10 हजार है उसे बढ़ाकर 25 हजार की जाए।साथ ही धारा 194 A -5000 रुपए से ऊपर ब्याज पर TDS . यह सीमा वर्षों पूर्व तय की गई थी। अब इसे बढ़ाकर 10 हजार कर दिया जाना चाहिए ?
6-टीडीएस की दर को ब्रोकरेज पर 5 से घटाकर 3.50,प्रोफशनल पर 10 से घटाकर 7.50 व सराफी लोन व्याज पर 10 से घटाकर 7.50% किया जाना चाहिए।
7- डेप्रिसेशन की प्रक्रिया को एज पर बुक्स व कम्पनी एक्ट को एक ही किया जाना चाहिए।साथ ही एसेसमेन्ट व एकाउंटिंग इयर्स को एक ही किया जाए।
8- आयकर व टैक्स ऑडिट के रिटर्न फ्रॉम 1 अप्रैल को ही पोर्टल पर आ जाना चाहिए।

 जीएसटी पर निराश न करें सरकार

1- मेडिक्लेम व अन्य इंसोरेन्श पर लगने वाली जीएसटी दर 18% को कम किया जाए ताकि कोरोना महामारी के चलते आम आदमी को अधिक बोझ न पड़े।
2- जीएसटी आर 1 पर अधिक से अधिक लेट फीस को लगाया जाए ताकि हर टैक्सपेयर समय पर रिटर्न फाइल करे साथ ही क़वाटरली वालों को भी रेगुलर किया जाना चाहिए।जिससे सामने वाले व्यक्ति को उसका आईटीसी समय पर मिल सके।
3- हाल ही में कपड़े पर जीएसटी 5 से 12% करने के नोटिफिकेशन को कुछ समय के लिए हटाया गया पर सरकार से आग्रह है कि लगातार कोरोना काल को देखते हुए इसे 5% की रखा जाए।
3- जीएसटी रजिस्ट्रेशन की प्रकिया को सरलीकरण करने के साथ साथ जो टैक्सपेयर गलत तरीके से आईटीसी क्लेम कर रहे है उन पर कठोर कानून बनाया जाए ताकि ईमानदार व्यापारियों को दिक्कत न हो।
4- ट्रांसपोर्ट में लगने वाली आरसीएम को पूरी तरह खत्म किया जाना चाहिए।
5- नए नियम के अनुसार जीएसटी आर 2 बी जिसमे जितनी आईटीसी दिखाई देगी उतनी की आईटीसी 3 बी रिटर्न में ले पाएंगे जो कि ये नियम सरासर गलत है कारण की विक्रेता रिटर्न नहीं भर पाया तो क्रेता  को क्या “शक्तियां” प्राप्त है क्यों कि क्रेडिट तो उसी की रूक रही है।इस पर सरकार को पुनः विचार करना चाहिए।
6- पोर्टल की वजह से इनकम टैक्स व जीएसटी के रिटर्न फाइल में लगने वाली लेट फीस को माफ किया जाना चाहिए।